पदोन्नति(Promotion) -स.शिक्षक एवं शिक्षक (LB) ई एवं टी संवर्ग को मिलेगी पदोन्नति और क्रमोन्नति ,,,,,,मध्यप्रदेश स्कूल शिक्षा विभाग ने अपने सेवा शर्त में शामिल किया प्रावधान ,,छग में भी हो सकता है लागु



पदोन्नति(Promotion) -स.शिक्षक एवं शिक्षक (LB) ई एवं टी संवर्ग को मिलेगी पदोन्नति और क्रमोन्नति : हाईकोर्ट ने नियमित पदोन्नति करने के निर्देश दिए :

छत्तीसगढ़ स्कूल शिक्षा विभाग में संविलियन होने के बाद शिक्षक एल बी बने शिक्षक पंचायत संवर्ग में ऐसे कई शिक्षक कार्यरत है जो 1998 से एक ही पद में कार्यरत है जिन्हे न तो पदोन्नति का लाभ मिला है और न ही क्रमोन्नति मिला है।

ऐसे में यदि इनका सेवाकाल देखा जाये तो 21 वर्ष का लम्बा अवधि होता है। निश्चित ही ये बहुत अनियमितता कहा जा सकता है। क्योंकि इतने वर्षों में किसी भी प्रकार का लाभ न मिलना किसी भी कर्मचारी के साथ शोषण है।
आज के इस पोस्ट में हम आपको शिक्षकों को मिलने वाली क्रमोन्नति और पदोन्नति के बारे में बताने वाले है। और साथ ही मप्र द्वारा जारी संविलियन आदेश में पदोन्नति और क्रमोन्नति की गणना कैसे की गयी गई उसके बारे में भी बातएंगे। तो ये जानकारी आप शुरू से अंत तक पढ़ते रहें और पूरी जानकारी प्राप्त करें।

फ्रेंड्स आपको यहाँ ये जानना बहुत जरुरी है कि छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने पदोन्नति मामले में स्पष्ट करते हुए शासन को निर्देश दिया है की वह नियमानुसार और नियमित रूप से कर्मचारियों की पदोन्नति कर सकते है। हाई कोर्ट ने ये फैसला 8 जनवरी 2020 को दिया है।

पदोन्नति की इन्तजार कर रहे सभी शिक्षकों के लिए यह बहुत ही सुखद समाचार है क्योंकि अब शिक्षकों को भी नियमित पदोन्नति मिलेगी। संविलियन हुए शिक्षकों को भी अब पदोन्नति की पात्रता होगी और वे पदोन्नति का लाभ प्राप्त कर सकेंगे।



शिक्षाकर्मी के इतिहास पर एक नजर डालें तो हमें पता चलता है ही पहले शिक्षाकर्मी को संविदा आधार पर रखा जाता था और उन्हें मानदेय मिलता था । बाद में कुछ संसोधन किया गया और वेतनमान लागु किया गया और पुरे साल भर वेतन की पात्रता मिली।

लेकिन शिक्षाकर्मियों ने इस संसोधन के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद जारी रखा और समय समय पर कई आंदोलन भी करते रहे।  परिणाम ये हुआ कि धीरे धीरे आंदोलन से कुछ न कुछ वेतन में सुधार होते गया। लेकिन सेवा शर्तों में कोई बदलाव नहीं हुआ। 
शिक्षाकर्मियों के बारे में एक और बात है जो निश्चित ही पीड़ादायक है और ओ यह है की शिक्षाकर्मी वर्षों से छत्तीसगढ़  सरकारी स्कूल में  अपना पूरा योगदान देते आ रहे है लेकिन कोई भी ये नहीं बता सकता की शिक्षाकर्मी आखिर किस विभाग के कर्मचारी है जो सोचने वाली बात है।

कोई भी कर्मचारी  उनके नियुक्ति के समय सारी बातें सेवा शर्तें और विभाग बता दिया जाता है। और कर्मचारी उसी विभाग के अधीन कार्य करता है।
दरअसल शिक्षाकर्मियों की बात करें तो उनकी नियुक्ति पंचायत विभाग से होती है लेकिन वे काम शिक्षाविभाग में करते है। लेकिन जब अधिकार की बात आती है वेतन की बात  आती है तो कोई भी विभाग ये नहीं कहता है की शिक्षाकर्मी हमारे कर्मचारी है।

ये लड़ाई काफी लम्बी चली और पिछले साल 2018 में शिक्षाकर्मियों का संविलियन स्कूल शिक्षा विभाग में करने की घोषणा कर दी गयी।और प्रक्रिया शुरू भी कर दिया गया। जुलाई 2018 में लगभग एक लाख अठारह हजार शिक्षा कर्मियों  संविलियन की सौगात मिली।



संविलियन के लिए शिक्षाकर्मियों की सेवा कम से कम आठ वर्ष निर्धारित की गयी और ये भी कहा गया की जब जब शिक्षाकर्मी आठ वर्ष पूरा करेंगे उनका संविलियन स्कूल शिक्षा विभाग में कर दिया जायेगा। आपको बता दें कि संविलियन की प्रक्रिया जुलाई और जनवरी में प्रभावशील है। जो भी शिक्षाकर्मी निर्धारित समय में आठ वर्ष पूरा करता है उनका संविलियन स्कूल शिक्षा विभाग में होता जायेगा। 

संविलियन के बाद पदोन्नति और क्रमोन्नति  - संविलियन के बाद अगर पदोन्नति और क्रमोन्नति की बात करें तो छत्तीसगढ़ स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा अभी तक ऐसा कोई गाइडलाइन प्रसारित नहीं किया गया की संविलियन प्राप्त शिक्षकों की  क्रमोन्नति किस आधार पर और कैसे होगी। सुनने में ये भी आया है की संविलियन  पांच वर्ष की सेवा  पदोन्नति और दस वर्ष सेवा के बाद क्रमोन्नति दिया जायेगा।

स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा ऐसा किया गया तो जो शिक्षक 1998 से कार्य कर रहा है उनकी सेवा अवधि 30 वर्ष हो जाएगी इसके साथ ही कई ऐसे शिक्षक है जो रिटायर भी हो जायेंगे कुछ की सेवा दो या चार साल बची होगी ऐसे में इन शिक्षकों के साथ अन्याय होगा। 
मध्यप्रदेश स्कूल शिक्षा विभाग के आदेश से जगी उम्मीदमध्यप्रदेश में भी बहुत लम्बे अरसे से संविलियन की लड़ाई लड़ रहे शिक्षकों को राहत भरी खबर मिली है। दरअसल मध्यप्रदेश सरकार ने वहा कार्यरत लगभग ढाई लाख अध्यापकों का संविलियन स्कूल शिक्षा विभाग में किया है। और इसके साथ ही उनके लिए नयी सेवा शर्तें भी लागु की गयी है। 


मध्यप्रदेश पंचायत अध्यापक संवर्ग एवं नगरीय निकाय अध्यापक संवर्ग के लिए मप्र सरकार ने नए सेवा शर्तें 2018 लागू किये है। इसके साथ ही पूर्व नियमों के अंतर्गत कार्यरत अध्यापक संवर्ग को नए नियम के अंतर्गत स्कूल शिक्षा विभाग में नए पदों  नयी नियुक्ति दी गयी है। 

अध्यापक संवर्ग की नयी नियुक्ति के पश्चात् उनकी सेवा 1 जुलाई 2018 से प्रभावशील होगी साथ ही इस तिथि से  का निर्धारण  किया जायेगा। साथ ही 1 जुलाई 2018 की स्थिति में 6 वे वेतन प्राप्त हो रहे वेतन के आधार पर 7 वे वेतनमान की पात्रता होगी

संविलियन के पश्चात् शिक्षकों को नियत वेतन पर शाशन द्वारा समय समय पर शासकीय सेवकों को देय महंगाई भत्ता भी प्राप्त होगा आदेश में स्पष्ट किया गया है की सातवे वेतन मान का लाभ १ जुलाई २०१८ से नियुक्त किये गए सभी शिक्षकों को मिलेगा जिसकी एरियर्स राशि भी दिया जायेगा। 

अध्यापक संवर्ग को दिनांक 01.01.2016 से 6 वां वेतन मान स्वीकृत है। और 01.07.2017 से इसका नगद भुगतान स्वीकृत है। दिनांक 01.01.2016 से दिनांक 30.06.2017 तक की एरियर्स राशि का भुगतान  दिनांक 01.04.2018 से प्रारम्भ  कर दिया जायेगा जिसे तीन वित्तीय वर्ष में भुगतान करने के निर्देश दिए गए है। 


पदोन्नति ,क्रमोन्नति ,समयमान की पात्रता शासकीय सेवकों को निर्धारित अर्हता  और सेवा पूर्ण करने पर पदोन्नति की पात्रता होती है। यदि पदोन्नति की लिए पद उपलब्ध  नहीं है तो शासकीय सेवक को प्रोत्साहित करने के लिए क्रमोन्नति /समयमान  का प्रावधान है।

भर्ती नियम 2018 के अंतर्गत नियुक्ति नविन है लेकिन सरकार द्वारा सहानुभूति पूर्वक विचार कर अध्यापक संवर्ग के लिए उनके द्वारा पूर्व में  की गयी सेवा को पदोन्नति /क्रमोन्नति /समयमान  की पात्रता में गणना करने का निर्णय लिया गया है। 

भर्ती नियम 2018 में अगले पद पर पदोन्नति के लिए 5 वर्ष का अनुभव निर्धारित की गयी है इस प्रयोजन के लिए अध्यापक संवर्ग में की गयी सेवा अवधि को पदोन्नति /क्रमोन्नति। समयमान की गणना  में शामिल किया जायेगा।

आपको उदाहरण के तौर पर बताना चाहेंगे कि -यदि कोई अध्यापक 2015 में नियुक्त हुआ है और दिनांक 1.07.2018 को उनकी नयी नियुक्ति प्राथमिक शाला शिक्षक  के पद में होती है तो उस शिक्षक के पदोन्नति के लिए 2015 से 30.06.2018 तक के अनुभव को शामिल किया जायेगा। इसके अनुसार उस शिक्षक का पदोन्नति 2020 में हो जायेगा। 

क्रमोन्नति के लिए 12 वर्ष की सेवा अवधि निर्धारित की गयी है। इसमें भी अध्यापकों की  पूर्व में की गयी सेवा /अनुभव को शामिल किया जायेगा अर्थात कोई भी शिक्षक 2010 में नियुक्त हुआ है और 2018 में उनका संविलियन स्कूल शिक्षा विभाग में हो गया है तो उनकी सेवा 2010 से  मानी  जाएगी और 2022 में उनको प्रथम क्रमोन्नति का लाभ मिल जायेगा।   
क्रमोन्नति आदेश (सूची )
मध्यप्रदेश में अध्यापकों की क्रमोन्नति सूचि जारी की गयी है। नीचे पूरी जानकारी देखें 
👉12 वर्ष (एक ही पद में ) पूर्ण करने वाले अध्यापक संवर्ग को क्रमोन्नति का लाभ दिया गया। क्रमोन्नति सूचि यहाँ से प्राप्त करें। 

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छत्तीसगढ़ में भी पदोन्नति और क्रमोन्नति की आस - छत्तीसगढ़ स्कूल शिक्षा विभाग में संविलियन हुए शिक्षकों की अब मप्र के आदेश जारी होने के बाद एक नयी आस जग गयी है। दरअसल मप्र में अध्यापकों का संविलियन स्कूल शिक्षा विभाग में करने के साथ ही पदोन्नति और क्रमोन्नति की पात्रता को स्पष्ट कर दिया गया है। एवं  आदेश में साफ साफ कहा गया है की पूर्व में की गयी सेवा को पदोन्नति और क्रमोन्नति के लिए गणना किया जायेगा। 


आपको मप्र की आदेश कॉपी देखने का लिंक नीचे दिया गया है आप यहाँ से पूरा विवरण प्राप्त कर सकते है। और अपने पदोन्नति और क्रमोन्नति के लिए आगे प्रयास कर सकते है। निश्चित ही इस ओर सभी को ध्यान देना चाहिए और मिलकर प्रयास करना चाहिए। तो निश्चित ही सफलता मिलेगी।

दोस्तों आज का ये जानकारी अगर आपको अच्छा लगा हो तो अपने दोस्तों में भी जरूर शेयर करें ताकि उनको भी इसके बारे में जानकारी मिल सके हुए अपने हक की लड़ाई को आगे बढ़ा सके। 
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